भारत के मिसाइल मैन कहे जाने वाले महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि...आइए उनके विचारों को दुनिया के कोन-कोने तक फैलाएं.
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भारत के मिसाइल मैन कहे जाने वाले महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि…आइए उनके विचारों को दुनिया के कोन-कोने तक फैलाएं.

       दिल्ली से शिलांग तक के अंतिम सफर..

भारत के मिसाइल मैन कहे जाने वाले महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि…आइए उनके विचारों को दुनिया के कोन-कोने तक फैलाएं.

भारत के मिसाइल मैन कहे जाने वाले महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि…आइए उनके विचारों को दुनिया के कोन-कोने तक फैलाएं.

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दिल्ली से शिलांग तक के अंतिम सफर में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ उनके सलाहकार सृजनपाल सिंह बिल्कुल उनके साथ रहे। उन्होंने कलाम के साथ बिताए एक-एक पल को याद किया। सृजन जब उन पलों को याद करते हैं, तो बस याद ही करते रह जाते हैं।

सृजन ने फेसबुक पर बताया कि वह दिल्ली से शिलांग कलाम साहब के साथ ही गए थे। पहले फ्लाइट फिर कार से कार्यक्रम स्थल पहुंचने तक कलाम संसद में मौजूदा गतिरोध पर बात करते रहे।

सृजन के मुताबिक नींद की झपकी में पुरानी यादें सामने ‌आ रही हैं,कभी आसुओं के रूप में। 27 जुलाई को हमारा दिन दोपहर 12 बजे शुरू हुआ जब हमने गुवाहाटी के लिए हवाई जहाज में अपनी-अपनी सीट ग्रहण की। वो गहरे रंग का कलाम सूट पहने हुए थे और मैंने उसकी तारीफ करते हुए कहा अच्छा रंग है सर। ये क्या पता था कि वह आखरी रंग है जो उन्हें पहने देख रहा हूं।

मानसून में ढाई घंटे की लंबी उड़ान में मुझे घबराहट हो रही थी और उन्हें महारत हासिल थी। जब मुझे घबराहट हो वह मेरी खिड़की बंद कर दें और कहें की अब तुम्हे ‌कोई डर ‌दिखाई नहीं देगा। उसके ढाई घंटे कार से आईआईएम‌ शिलॉंग तक का सफर। इन पांच घंटों के सफर के दौरान हमने बातें ,चर्चा और बहस कीं। ऐ‌सी ही किसी प्रकार की यात्रा थी जैसी हमने पहले भी की थी।

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सृजन के मुताबिक इस यात्रा की तीन मुख्य बातें हमेशा यादगार बनकर रहेंगी। पहली वह की डॉ कलाम पंजाब में आतंकी हमले को लेकर बहुत चिंतित थे। हमले में लोगों के मारे जाने पर वह दुखी थे। आईआईएम में उनके व्‍याख्यान का विषय क्रिएटिंग ए लिवेबल प्लैनेट अर्थ था। उन्होंने इस घटना को उससे जोड़ दिया और कहा ‌कि मनुष्य की बनाई ताकतें धरती के लिए उतनी ही खतरनाक है जितनी कि प्रदूषण। हमने इस विषय पर चर्चा की।

हमारी दूसरी चर्चा देश पर ज्यादा केंद्रित थी। डॉ कलाम चिंतित थे कि दो दिनों से संसद की कार्यवाही ठीक प्रकार से नहीं चल पा रही है। उन्होंने कहा मैने अपने कार्यकाल में दो अलग सरकारें देखीं हैं। यह आगे भी होगा। यह ठीक नहीं है। मुझे कोई तरीका तलाशना होगा जिससे संसद सत्र में विकास पर राजनीति हो सके। उसके बाद उन्होंने मुझे आईआईएम के छात्रों के लिए प्रश्नकाल तैयार करने को कहा। जिसे अंत में छात्रों को देना था। इससे वह छात्रों से तीन तरीके जानना चाहते थे जिससे संसद सत्र ठीक तरीके से चल सके।

इसके बाद उन्होंने कहा हम उनसे कैसे पूछ सकते हैं जब हमारे पास खुद ही जवाब नहीं है। इसके अगले एक घंटे बाद तक हम इसी विषय पर बात करते रहे। वह इस विषय को आने वाली पुस्तक एडवांटेज इंडिया में भी रखना चाहते थे।

तीसरा उनके व्यक्तित्व से जुड़ा है हम 6-7 साथ कारों के काफिले में थे,मैं और डॉक्टर कलाम दूसरी कार में थे। आगे जवानों की खुली जिप्सी जा रही थी। जिसमें तीन जवान थे। दो आमने-सामने बैठे थे और एक बीच में खड़ा था। एक घंटे के बाद डॉक्टर कलाम ने पूछा ये जवान बंदूक ताने क्यों खड़ा है। वह थक जाएगा।ऐसा लग रहा है उसे सजा मिली है।

उन्होंने वायरलैस कर उसे बैठ जाने को कहने के लिए कहा,मुझे पता था कि ऐसा करना उसके ‌लिए आसान नहीं होगा,क्योंकि उन्हें खड़े रहने की हिदायत दी जाती है। लेकिन वायरलैस ने काम नहीं किया फिर भी कलाम साहब कहते रहे कि उसे बैठाने के लिए ट्राई करो।

लेकिन नाकामयाब होने पर वह बोले कि उससे मेरी मुलाकात कराओ और जब वह मिले तब उन्होंने हाथ मिलाकर जवान को धन्यवाद किया और पूछा‌ कि क्या तुम थक गए हो?क्‍या तुमे भूख लगी है? माफ करना मेरे कारण तुमे देर तक खड़े रहना पड़ा। उनके इस व्यवहार से वह स्तब्ध रह गया।

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